41. नाग/शेष वंश म्हणजे काय ? 96 कुळी मराठा

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• शेष वंश (नागवंश ) –

वंश सख्या 1

सूर्यवंश में ही एक शाखा में नंदिवर्धन ऊर्फ तक्षक नामक राजा हो गया  । इस राजा ने राजा परिक्षित को मार कर राज्य का विध्वंस किया था । यह तक्षक ऊर्फ नागवंश का पहला राजा था । चूकि उसने अपना राज्य तक्षक ऊर्फ शेषनाग या शिशुनाग को अर्पित किया था  । ये राजे लोग अपने नाम के आगे नाग उपपद लगाते हैं । जैसे शिशुनाग .  अजयनाग .  आदि  । इसी कारण से ये लोग अपने को शेष वंशी या नागवंशी कहलाते हैं । इनके ध्वज पर नागका चित्र रहता हैं.   । नागवंशी राजा लोग अपने झण्डे पर नाग के साथ सूर्य का चित्र भी चित्रित करते हैं । वर्तमान ग्वालियर के महाराजा भी नागवंशी है । इनके झण्डे पर नाग तथा सूर्य का चित्र अंकित हैं  ।

मराठा वंश माहिती
वंश म्हणजे काय
मराठा वंशावली का सिस्टम विश्व में सबसे अधिक व्यवस्थित तथा पूर्णता को लिये हुए हैं  । मराठा जाति में कुल 96 वंश प्रकार माने जाते हैं  । वंश परिचय के तहत कुळ इतिहास के अतिरिक्त निम्न बातों का भी समावेशा है –

•वंश का विशिष्ठ नाम
•वंश का प्रकार
• वंश का गोत्र
• वंश के अंतर्गत आने वाले उपकुल या पोटकुल उर्फ सरनेम
• वंश (कुल)का देवता
• वंश (कुल) की देवी
• वंश में विवाह के समय लगने वाली देवक याने विशेष पेड़पत्ती या विशेष वस्तु
• वंश का विजय शस्त्र
• वंश का राजचिन्ह  
• वंश का रंग
• वंश की मूल गादी
• वंश की उपाधी
• वंश की मुद्रा
• वंश का वेद
• वंश का मंत्र
• वंश का प्रवर
• वंश का गुरु •


एकूण वंश

संपूर्ण-माहिती-पहा

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धनंजय महाराज मोरे
धनंजय महाराज मोरे

9422938199

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